जयपुर की शाम अपने पूरे शबाब पर थी। हवा महल की गुलाबी दीवारों पर ढलते सूरज की किरणें पड़ रही थीं
और पूरा इलाका सुनहरी रोशनी में नहा गया था। सड़क पर पर्यटकों की भीड़ थी, लेकिन उस भीड़ के बीच आदित्य को केवल एक चेहरा दिखाई दे रहा था।
वह चेहरा था नायरा का।
आदित्य दिल्ली से जयपुर एक फोटोग्राफी प्रोजेक्ट के सिलसिले में आया था। उसे ऐतिहासिक इमारतों और पुरानी गलियों की तस्वीरें लेना पसंद था। जयपुर उसके लिए सिर्फ एक शहर था, लेकिन उसे नहीं पता था कि यह शहर उसकी जिंदगी की सबसे खूबसूरत कहानी लिखने वाला है।
उस दिन वह हवा महल के सामने खड़ा तस्वीरें ले रहा था। तभी उसकी नजर एक लड़की पर पड़ी जो सामने बैठकर अपनी स्केचबुक में हवा महल का चित्र बना रही थी। उसके चेहरे पर एक सादगी थी और उसकी आँखों में एक अलग ही चमक।
आदित्य ने अनजाने में उसकी ओर कुछ ज्यादा देर तक देख लिया।
लड़की ने सिर उठाया और मुस्कुरा दी।
बस, वहीं से कहानी शुरू हो गई।
कुछ देर बाद आदित्य उसके पास गया और उसके बनाए स्केच की तारीफ की।
"तुम बहुत अच्छा बनाती हो," उसने कहा।
लड़की ने मुस्कुराकर जवाब दिया, "और तुम अच्छी तस्वीरें लेते हो।"
दोनों हँस पड़े।
उसका नाम नायरा था। वह जयपुर में रहती थी और एक कलाकार थी। उसे शहर की पुरानी इमारतों और उनकी कहानियों को अपनी कला में उतारना पसंद था।
बातों-बातों में दोनों पास के एक कैफे में पहुँच गए। चाय के साथ शुरू हुई बातचीत किताबों, सपनों और यात्राओं तक पहुँच गई। उन्हें महसूस हुआ कि वे एक-दूसरे को वर्षों से जानते हों।
अगले कुछ दिनों में उनकी मुलाकातें बढ़ने लगीं।
कभी वे जोहरी बाजार की गलियों में घूमते, कभी सिटी पैलेस के शांत आंगन में बैठकर बातें करते और कभी जल महल के किनारे शाम बिताते।
लेकिन उनकी सबसे पसंदीदा जगह हमेशा हवा महल ही रहती।
नायरा कहती थी, "इस महल की खिड़कियों से सिर्फ हवा नहीं गुजरती, कई कहानियाँ भी गुजरती हैं।"
आदित्य मुस्कुरा देता।
उसे लगता था कि उनकी कहानी भी उन्हीं कहानियों में शामिल हो चुकी है।
एक शाम दोनों हवा महल के सामने बैठे थे। सड़क की रौनक अपने चरम पर थी। आसमान गुलाबी और नारंगी रंगों से भर गया था।
"क्या तुम्हें लगता है कि कुछ लोग किस्मत से मिलते हैं?" नायरा ने पूछा।
आदित्य ने उसकी ओर देखा।
"अगर नहीं मिलते, तो शायद मैं आज यहाँ नहीं होता।"
नायरा हल्के से मुस्कुराई, लेकिन उसकी आँखों में एक अनकहा भाव था।
समय तेजी से बीत रहा था।
आदित्य का प्रोजेक्ट खत्म होने वाला था और उसे वापस दिल्ली लौटना था।
यह बात दोनों जानते थे, लेकिन कोई इसका जिक्र नहीं करना चाहता था।
आखिरकार वह दिन आ ही गया।
विदा होने से एक शाम पहले दोनों फिर हवा महल के सामने मिले।
रात की रोशनी में महल पहले से भी ज्यादा खूबसूरत लग रहा था।
कुछ देर तक दोनों खामोश बैठे रहे।
फिर नायरा ने धीरे से कहा, "कल तुम चले जाओगे।"
आदित्य ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
"और फिर?"
यह सवाल जितना छोटा था, जवाब उतना ही मुश्किल।
आदित्य ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा, "फिर मैं वापस आऊँगा।"
"अगर नहीं आए तो?"
आदित्य मुस्कुराया।
"तो मेरा दिल मुझे वापस ले आएगा।"
नायरा की आँखें नम हो गईं।
उसने पहली बार उसका हाथ थाम लिया।
उस पल हवा महल की ऊँची खिड़कियाँ, शहर की रोशनियाँ और ठंडी हवा सब जैसे उनकी कहानी के गवाह बन गए।
अगले दिन आदित्य दिल्ली लौट गया।
दूरी आसान नहीं थी।
कई बार नेटवर्क की समस्या होती, कई बार काम की व्यस्तता आ जाती। लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी।
हर रात वे बात करते।
हर सुबह एक-दूसरे को संदेश भेजते।
और हर महीने मिलने का कोई न कोई बहाना ढूँढ़ लेते।
एक साल बाद आदित्य फिर जयपुर आया।
इस बार किसी प्रोजेक्ट के लिए नहीं।
इस बार वह अपने भविष्य के लिए आया था।
शाम का वही समय था।
हवा महल के सामने वही जगह थी जहाँ उनकी पहली मुलाकात हुई थी।
नायरा वहाँ उसका इंतजार कर रही थी।
जब उनकी नजरें मिलीं, तो दोनों मुस्कुरा उठे।
आदित्य उसके सामने आकर रुका और बोला,
"तुमने कहा था कि इस महल की खिड़कियों से कई कहानियाँ गुजरती हैं।"
नायरा मुस्कुराई।
"हाँ।"
"तो क्या हमारी कहानी यहीं से हमेशा के लिए शुरू हो सकती है?"
नायरा की आँखों में खुशी छलक उठी।
उसने बिना कुछ कहे सिर हिला दिया।
उस शाम हवा महल सिर्फ एक ऐतिहासिक इमारत नहीं था।
वह दो दिलों की नई शुरुआत का गवाह बन चुका था।
और जयपुर की हवाओं में एक नई प्रेम कहानी हमेशा के लिए बस गई थी—एक ऐसी कहानी, जो हवा महल के साये में शुरू हुई और हमेशा के लिए इश्क़ बन गई।